आपकी सकारात्मक सोच ही इस दुनिया को स्वर्ग बनायेगी | Positive Thought by ...

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  1. *सतनाम जाने बिना, हंस लोक नहिं जाए।* 
    ज्ञानी पंडित सूरमा, कर कर मुये उपाय।।

    जो जल बाढ़े नांव में, *घर में बाढ़े दाम।* 
    *दोऊ हाथ उलीचिये, यही सयानो काम।।*

    *कबीरा ते नर अंध है, गुरु को कहते और।* 
    *हरि रूठे गुरु ठौर है, गुरु रूठे नहीं ठौर॥*  ‌‌ *ईश्वर अंश जीव अविनाशी, चेतन अमल सहज सुख राशि*‌

    *चेतन अमल का तात्पर्य है कि, हमारे शरीर में आवश्यक जीवन बनाने हेतुसर हम जो खाना खाते हैं, उस खाने को हमारे प्राणों मे परिवर्तन करनेवाले ही चेतन है। वह चैतन्य अ=अन्न और मल=मळ शुद्धिकरण अर्थात अन्न को मल में रुपांतरण करके प्राणेश्वर जीवन शक्ति देने वाले स्वयं चेतन्य है। जब मनुष्य ध्यान द्वारा चित्त को एकाग्र करके इस चेतन का संपूर्ण कार्य प्रणाली पर अभ्यास द्वारा विधिवत अनुभव कर समझ जाएंगे तब जाकर आपने यहां लिखी गई बात मनुष्य अपने जीवन में उतारकर ईश्वर का साक्षात्कार कर सकते हैं और सहजता ही सुखराशि ईश्वर को पा सकते हैं। इसी तरह मनुष्य जीव अपने आप के अंश से स्वयं ईश्वर में समर्पित भी हो सकता है जी 🙏 जैसे यहां लिखा है👇*

    *ईश्वर के अंश होने के कारण हम परम आनंद को पाने के अधिकारी हैं, चेतना के उस दिव्य स्तर तक पहुंचने के अधिकारी हैं जहाँ विशुद्ध प्रेम, सुख, ज्ञान, शक्ति, पवित्रता और शांति है. सम्पूर्ण प्रकृति भी तब हमारे लिये सुखदायी हो जाती है. इस स्थिति को केवल अनुभव किया जा सकता है यह स्थूल नहीं है अति सूक्ष्म है परम की अनुभूति अंतर को अनंत सुख से ओतप्रोत कर देती है, और परम तक ले जाने वाला कोई सदगुरु ही हो सकता है. सर्व भाव से उस सच्चिदानंद की शरण में जाने की विधि वही सिखाते हैं. हम देह नहीं हैं, देही हैं, जिसे शास्त्रों में जीव कहते हैं. जीव परमात्मा का अंश है, उसके लक्षण भी वही हैं जो परमात्मा के हैं. वह भी शाश्वत, चेतन तथा आनन्दस्वरूप है.*

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